Bol Bindas || यहां से फैल सकता है संक्रमण

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लॉक डाउन की उड़ रही है, धज्जियां…..

शासन-प्रशासन केवल लूट रहे हैं, अपना वाह-वाही…..

विवेक चौबे, गढ़वा

 

गढ़वा : कोरोना विश्वव्यापी महामारी को लेकर राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के रूप में लॉक डाउन लगा दिया गया है, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो सके। किन्तु यहां तो लॉक डाउन का पालन सख्ती से नहीं किया जा रहा है, बल्कि यों कहें कि सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन व स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के रूप में लगाए गए लॉक डाउन की धज्जियां जम कर उड़ाई जा रही है। यह मामला है जिले के कांडी थाना क्षेत्र अंतर्गत राजा घटहुआँ के मेहता टोला की, जहां दो पासियों के द्वारा ताड़ के पेड़ों से ताड़ी चुआने का काम किया जाता है। यहां बांध पर दर्जनों गांवों के सैकड़ों लोगों की बड़ी जमात जमी रहती है। देर रात तक ताड़ी पीने वाले ग्राहकों की भीड़ लगती है। यहां से कोरोना संक्रमण के प्रसार का पूर्ण संभावना है। उधर कांडी पुलिस कहती है कि सभी लोग लॉक डाउन का पालन करें। ऐसे में प्रशासन द्वारा केवल कहे जाने से क्या लॉक डाउन का पालन हो सकेगा, यह सोचनीय तथ्य ही है। हालाकि इस सम्बंध में कांडी थाना प्रभारी को लगातार दो दिनों से सूचना दी जा रही है, किन्तु आश्वासन दिया जा जाता है कि गश्ती पर लगे जवान इस पर ध्यान अवश्य देंगे। अब तक कोई कार्यवाई नहीं कि गयी। सड़क पर लौडस्पीकर के माध्यम से प्रचार-प्रसार किए जाने से नहीं लगता कि कोरोना के संक्रमण को रोका जा सकेगा। यह कष्टकारी व विपरीत समय मनुष्य प्राणी के लिए ठीक नहीं है। लॉक डाउन का पालन कांडी पुलिस सख्ती से नहीं करा पा रही है, जिसका जीता जागता प्रमाण है। इस प्रकार शाशन प्रशासन केवल वाहवाही ही लूटते नजर आ रहे हैं। जहां संक्रमण का डर है, वहां न ही पुलिस पहुंच रही है, न ही कोई अधिकारी। सूत्रानुसार मिली जानकारी के अनुसार देर रात तक ताड़ी पीते-पीते नशे के चूर में नशेड़ी काफी शोरगुल, गाली-गलौज व अभद्र भाषा का भी प्रयोग करते हैं, जिससे मेहता टोला के लोगों को रहना मुश्किल हो गया है। नशा के कारण ही चोरी-डकैती, बलात्कार, मारपीट होने के आसार होते हैं। नशा पर प्रतिबंध हेतु प्रशासन को सख्ती दिखाना चाहिए। इस प्रकार उक्त गांव स्थित बांध पर ताड़ी बेचे जाने से पढ़ने-लिखने वाले छोटे बच्चों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। वहीं मिली जानकारी के अनुसार उक्त गांव के ही कुछ चमचों द्वारा ताड़ी बेचवाया जा रहा है, जिन्हें पासी के द्वारा मुफ्त में ताड़ी दिया जाता है। इस सम्बंध में पासी- गोलू कुमार चौधरी से पूछे जाने पर उसने बताया कि गांव के लोगों ने ही ताड़ी बेचने को कहा है। हालाकि गोलू एक नाबालिक लड़का है। जिस नाबालिक लड़का का उम्र पढ़ने-लिखने का है, जिसके हाथ में कॉपी-किताब व कलम होनी चाहिए, उसके हाथ में ताड़ी बेचने के सामग्री व लबनी देखा जा रहा है, इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार पढ़ने-लिखने वाले बच्चों को कितना साथ दे रही है। क्या ताड़ी बेचने से ऐसे नाबालिक लड़कों का भविष्य कभी सुधर सकेगा। इस कोरोना काल में नेता से लेकर शासन प्रशासन तक सभी वाहवाही लूटते ही केवल नजर आ रहे हैं।

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