Bol Bindas || “पिकनिक” के लिए “उपयुक्त” है यह “स्थल”

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यह स्थल हु-ब-हु स्वर्ग जैसा ही होता है, प्रतीत…..

विवेक चौबे की ✍️ से

 

Jharkhand : नए वर्ष की पहली जनवरी जल्द ही आने वाली है। इस दिन अधिकतर लोग उत्साहपूर्वक शांतिपूर्ण वातावरण जैसी सुन्दरनुमा जगह ढूंढने को अधिक बेताब होते हैं। उन्हें फैसला कर पाना भी मुश्किल होता है कि वे पिकनिक के लिए जाएं भी तो कहाँ। हर किसी के मन में ऐसा ही सवाल आता है। क्या आप भी ऐसे स्थल पर पहुंचना चाहते हैं, जहां आप पहली जनवरी का भरपूर आनंद उठाने के लिए ख़ूबसूरतनुमा स्थान चुनना चाहते हैं।

यह स्थल स्वर्ग जैसा है, सुंदर…..

आज हम ऐसे ही स्थल की विवेचना करते हैं, जो बड़ी आकर्षक स्थान है। यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को अलग प्रकार के ही सुकून का अनुभव प्राप्त होता है। एकांत व शांत ही नहीं बल्कि देवताओं के भी कई बड़े-बड़े मंदिर हैं। इसलिए यह स्थल हू-ब-हू स्वर्ग जैसा ही सुंदर प्रतीत होता है।

सालों भर झरता है, झरना…..

जी हां, हम बात कर रहे हैं राज्य के गढ़वा जिले के कांडी प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत सरकोनी पंचायत में स्थित प्रसिद्ध सतबहिनी झरना तीर्थ व पर्यटन स्थल की। यह स्थल एक अनमोल प्राकृतिक धरोहर व लाखों श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। यह प्राकृतिक सौंदर्यवान स्थल अति मनमोहक है। इस स्थल की बड़ी विशेषता यह है कि सालों भर किसी भी मौसम में मनोरम झरना झरझर झरते रहता है, जो बहती पवित्र पंडी नदी से संयुक्त है। यहां चारों ओर रोपे गए पेड़-पौधे और भी इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। ऊंचे-नीचे टीले, कल-कल करती बहती नदी, सुंदर वादियां लोगों को मंत्र मुग्ध कर देते हैं। मैं तो कहता हूं कि नए वर्ष की पहली जनवरी पर पिकनिक हेतु लुफ्त उठाने के लिए यह स्थल एकदम फिट है। बता दें कि यहां बीते साल के अंतिम व नए साल के पहले दिन को पर्यटकों की अपार भीड़ होती है। राज्य के सभी जिलों के अलावे छत्तीसगढ़, बिहार, मध्यप्रदेश, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, उड़ीसा सहित देश के विभिन्न राज्यों से भी यहां पर्यटकों का आगमन होता है।

मनवांछित फल होता है, प्रदान…..

ऐसा कहा जाता है कि इस स्थल में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं द्वारा झरना में स्नान कर सतबहिनी माई के दर्शन मात्र कर लेने से सभी प्रकार के कष्ट तो दूर होते ही हैं, बल्कि मनवांछित फल भी प्रदान होते हैं। यहां मां सतबहिनी, मां काली, भोले बाबा, मां लक्ष्मी, बाबा भैरो नाथ, बजरंगबली, साक्षी गणेश, नंदी महाराज, भगवान भाष्कर सहित कई मानव निर्मित मंदिर हैं।

नहीं पहुंचे तो कहे जाएंगे बदनसीब…..

यदि इस स्थल पर नहीं पहुंचे तो शायद आप बदनसीब ही कहे जाएंगे, जहां सच्चे हृदय से मां का स्मरण व नमन करने वाले श्रद्धालुओं की हर मन्नत अवश्य ही पूरी होती है। खाश बात यह कि यहां माद-मदिरा सख्त प्रतिबंधित है। इस स्थल क्षेत्र में केवल शाकाहारी भोजन ही ग्रहण किया जा सकता है। हालांकि अधिकतर लोग यहां मीठे भोजन के रूप में खीर खाना अधिक पसंद करते हैं। यदि आपने अब तक पिकनिक मनाने के लिए कोई स्थान नहीं चुन पाया है तो एक बार इस स्थल पर पहुंचकर अवश्य ही मनमोहक दृश्य का अवलोकन करें। शतप्रतिशत बता रहे हैं कि यहां आपको बहुत ही मजा आएगा।

बंगाल तक के साधक होते थे, शामिल…..

पुराने लोग कहते हैं कि यहां कभी एक संत महात्मा सामदास रहा करते थे, जो भूमिगत मार्ग से झरना क्षेत्र में पहुंचकर अपनी आंतों को बाहर निकाल उसे निर्मल किया करते थे। तत्पश्चात गुफा गर्भ में पहुंचकर इष्ट देवताओं की साधना किया करते थे। कुछ ऐसी भी अनोखी बातें कही जाती हैं कि यहां बंगाल तक के भी साधकों की बड़ी जमात जमी रहती थी।

जानिए, इस स्थल की दूरी…..

सतबहिनी झरना तीर्थ व पर्यटन स्थल- रांची (झारखंड की राजधानी) से 235 किमी, गढ़वा जिला से 45 किमी व मझिआंव से तकरीबन 19 किमी दूर स्थित है।

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