Bol Bindas || “रक्षाबंधन”

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आपसी प्रेम व पवित्र रिश्ते का प्रतीक है, यह पर्व…..

विवेक चौबे, गढ़वा

 

गढ़वा : रक्षाबंधन शब्द से ही इसका अर्थ स्पष्ट हो जाता है। यह भाई-बहन के आपसी प्रेम व पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। यह दिन खाश इसलिए है कि बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है। बहन थाली में सुंदर तरीके से राखी व पूजा सामग्री को सजाती है, जिसमें रोली, चंदन, अक्षत शामिल किया जाता है। साथ ही शुद्ध घी का दीपक जलाया जाता है। बहन का भाई पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके राखी बंधवाने के लिए बैठ जाता है। सर्प्रथम भाई के मस्तक पर रोली का तिलक लगाया जाता है। कलाई पर राखी बांध कर, आरती की जाती है। इसके पश्चात बहन अपने हाथ से अपने भाई को मिठाई खिलाती है। छोटी बहन अपने भैया को राखी बांध कर आशीर्वाद प्राप्त करती है। जबकि बड़ी बहन राखी बांधकर आशीर्वाद देती है। साथ ही बहन अपने भाई के दीर्घायु होने के लिए ईश्वर से प्रार्थना भी करती है। वहीं भाई अपनी बहन को उपहार देते हुए सदैव उसकी रक्षा करने का वचन देता है। बता दें कि सोमवार को राक्षबन्धन है। इस दिन का इंतजार पूरे देश के भाई-बहनों को है। रक्षाबंधन के कई दिनों पूर्व से ही कई स्थानों पर राखी बिक रही है। रविवार को अधिक संख्या में महिलाओं व युवतियों को भाई के लिए रक्षा सूत्र खरीदते हुए देखा गया । जगह-जगह राखी की दुकानें सजी-धजी थीं। जबकि मिठाइयों की खरीदारी भी करते हुए लोगों को देखा गया। प्रत्येक वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है। रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के समय भद्राकाल व राहुकाल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार भद्राकाल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि लंका का राजा रावण ने अपनी बहन से भद्राकाल में ही राखी बंधवाई थी, जिस कारण रावण का सर्वनाश हो गया था। इसके अलावे भद्राकाल में भगवान शिव तांडव नृत्य करते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार तीन अगस्त यानी सोमवार को सुबह 09:29 बजे तक ही भद्रा रहेगी। वहीं राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह के 09:30 बजे से दोपहर के 12:11 बजे तक है।

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