Bol Bindas || “रंग” में रंगे “लोग”

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होलिका दहन के दूसरे दिन मनी,होली…..

विवेक चौबे,गढ़वा

 

गढ़वा : होली रंगों का ही त्योहार है। एकता के रंग में रंग कर धूमधाम से हिन्दू लोग होली मनाते हैं। बता दें कि रंग खेले जाने वाले दिन से तीन दिन पूर्व संवत गाड़ने का प्रावधान है। होलिका दहन के लिए स्थानीय युवाओं व बच्चों द्वारा शनिवार की रात्रि को संवत के रूप में कहीं सेमर के पेड़ का डाल तो कहीं रेड़ी का पौधा काट कर गाड़ा गया था। वहीं रविवार की रात्रि को उसे लोगों द्वारा लकड़ी आदि से मोटवाया गया था।

जबकि सोमवार की रात्रि को पूरे गांव के लोग इकट्ठा होकर मोटवाया गया होलिका में आग लगाई गयी। पूर्ण रूप से जलने के बाद संवत के रूप में गाड़ा गया पौधा तिलक लगाने के लिए बड़ी मसक्कत के बाद खोजा गया। उपस्थित लोगों ने साल-संवत अच्छा से व्यतीत होने की प्रार्थना करते हुए अपने-अपने मस्तक पर तिलक लगाया। वहीं गेहूं के बाल को भुटा बनाकर प्रसाद के रूप में लोगों के बीच वितरण किया गया। इस अवसर पर बच्चों ने बम-पटाखे आदि भी छोड़े। मंगलवार को दिनभर होली पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। हर गिले शिकवे भुलाकर लोग एक दूसरे के साथ रंग व अबीर-गुलाल डालते हुए,होली खेलते नजर आए।

कई जगहों पर ग्रामीणों के द्वारा होली गायन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

जबकि कई स्थानों पर डीजे की आवाज पर युवा व बच्चे थिरकते हुए भी नजर आए।

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